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36. जीवन-साथी से अलग होने के बाद बच्चों के लिए कौन सी व्यवस्थाएं सामान्य होती हैं?

जब पति-पत्नी अलग हो जाते हैं तो इससे उनके बच्चों पर भी प्रभाव पड़ता है। बच्चों के बारे में और वे इस अत्यंत कठिन समय में आपके और आपके जीवन-साथी के संबंध में क्या महसूस कर रहे हैं, इस बारे में विचार करना महत्वपूर्ण है।

बच्चे लचीले स्वभाव के होते हैं। वे स्वयं को अपने जीवन में होने वाले परिवर्तनों के अनुकूल कर लेंगे यदि उन्हें बताया जाए कि क्या होने वाला है, परंतु आपको सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें विवादों और बहसों से दूर रखा जाए।

याद रखें कि यद्यपि आपके और आपके जीवन-साथी के बीच अंतरंग संबंध समाप्त हो गया है, आप दोनों अभी भी बच्चों के माता-पिता हैं और आपको इस बने रहने वाले संबंध को संभालने के लिए कोई रास्ता ढूंढने की जरूरत है। बच्चों के लिए सबसे हितकर यह है कि वे अपने माता-पिता को उनके बारे में विचार-विमर्श करते और संयुक्त निर्णय लेते हुए देखें।

पति-पत्नी के अलग होने के बाद बच्चों के लिए क्या व्यवस्थाएं की जानी चाहिए, इस संबंध में कोई नियम नहीं है। प्रत्येक परिवार भिन्न होता है और आपको इस बारे में सहमत होना जरूरी है कि आपके लिए क्या बेहतर है।

ज्यादातर लोग इस बात से सहमत होते हैं कि बच्चे सामान्यतया माता-पिता दोनों के साथ बने रहने वाले अपने संबंध से लाभान्वित होते हैं। सामान्यतया बच्चे माता-पिता में से किसी एक के साथ अपना मुख्य घर रखते हैं (जिसे 'आवास' कहा जाता है) और दूसरे के साथ समय बिताते हैं (जिसे 'संपर्क' कहा जाता है)। साझा आवास रखा जाना भी संभव है, जिसका अर्थ है कि बच्चे दो घरों के बीच अपना समय विभाजित करते हैं। प्रत्येक घर में बिताया गया समय बराबर होना जरूरी नहीं है।

संपर्क कैसा होना चाहिए, इस संबंध में कोई नियम नहीं है। प्रत्येक स्थिति भिन्न होती है। उपयुक्त और सुरक्षित क्या है, यह प्रत्येक परिवार में भिन्न-भिन्न होगा। संपर्क लंबा हो सकता है और इसमें बच्चों का रात भर घर में ठहरना शामिल हो सकता है। अथवा यदि समझा जाता है कि बच्चों को माता या पिता में से किसी से खतरा हो सकता है तो परिवार के किसी अन्य सदस्य या किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष द्वारा इसकी निगरानी की जा सकती है। चरम स्थितियों में संपर्क को, केवल अप्रत्यक्ष संपर्क तक सीमित किया जा सकता है। इसका अर्थ है कि पत्र, कार्ड और उपहार भेजे जाते हैं परंतु कोई आमने-सामने का संपर्क नहीं होता।

बच्चों के लिए व्यवस्थाओं के संबंध में आपके बीच सहमति होना सबसे अच्छा होता है, परंतु यदि आप ऐसा नहीं कर सकते हैं, आप अपने विकल्पों के बारे में सलाह ले सकते हैं।

आपको जीवन-साथी से अलग होने के बाद बच्चों (भरण-पोषण) के लिए वित्तीय सहायता के बारे में सोचने की जरूरत होती है, जिस माता या पिता के साथ बच्चे अपना मुख्य घर नहीं रखते (जिसे 'अनुपस्थित माता/पिता' कहा जाता है) उसका दायित्व है कि वह बच्चों के दूसरे माता या पिता को भरण-पोषण का खर्च दे। बाल सहायता एजेंसी निर्धारित कर सकती है कि यह भरण-पोषण खर्च कितना होना चाहिए और उनकी वेबसाइट पर इसके बारे में उपयोगी जानकारी है।

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